बुधवार, 23 जून 2021

चौरी चौरा शहीद स्मारक, गोरखपुर

100 साल होने को आये .... 4 फरवरी 1922 को - अंग्रेजी हुकूमत के काले सिपाहियों के उकसाने पर, मां भारती की आजादी के मतवालों की गुस्साई भीड़ ने अपनी छाती  आगे कर दी थी । कई शहीद हुए और कई घायल । असहयोग आंदोलन के अहिंसक सिपाहियों के लिए , यह घटना बेहद उत्तेजक और क्षुब्ध कर देने वाली थी । इसके बाद इस घटना की प्रतिक्रिया में जो घटा , इतिहास ने उसे अपने ढंग से लिपिबद्ध किया ।चौरी चौरा थाना आग के हवाले कर दिया गया । थाना परिसर में जो भी था , जिंदा जलकर खाक हो गया ।
 इतिहासों के मुखर स्वरों में अमर कहानी कहन हुई ।
 गोरों की बर्बरता काली पलटन से ना सहन हुई ।
 सपन शांति की गरने वाली आंखों में अग्नि स्तवन हुई ।        चौरी चौरा में गोरों की लंका धू-धू कर दहन हुई ।
    प्रतिक्रिया में , गोरों का दमन चक्र बेहद भयानक था ।अंतिम परिणाम - 19 रणबाकुरों को फांसी , 14 लोगों को आजीवन कारावास और कई अन्य लोगों को दूसरी कठिन सजाएं दी गई । यह कोई प्रशिक्षित लोग नहीं थे , आसपास के गांव के आमजन थे, जिन्होंने भारत की आजादी के हवन कुंड में , अपनी जान की आहुति अर्पित कर दी थी ....
 देकर अपना रक्त जिन्होंने भारत भाग्य संवारा है ।
 सामंतवाद के मुंह पर बढ़कर एक तमाचा मारा है ।
 शौर्य की इस धरती पर डटकर सिंहों ने ललकारा है ।    अंग्रेजों का दंभ जहां पर रणवीरों से हारा है ।
       चौरी चौरा शहीद स्मारक में , इन 19 शहीदों सहित आजादी के कई अन्य दीवानों की प्रतिमा स्थापित है। इन पर अंकित तथ्य बताते हैं कि अधिकांश ने 40 वर्ष की आयु भी नहीं जी और कई तो 30 वर्ष भी नहीं । क्या दीवानापन था ... शहीदों ! आपकी शहादत को नमन ।  जीवन का हर पल दे डाला जिसने उसकी चौखट पर । प्राणदीप से किया उजाला जिसने उसकी चौखट पर ।
 श्रद्धा का एक दीप जलाएं चल कर चौरी चौरा में ।
 क्रांति युद्ध की सदी मनाएं चल कर चौरी चौरा में ।
    चौरी चौरा में जो घटा, उसका शताब्दी वर्ष है यह।  हम सबको यहां आना चाहिए... बार - बार आना चाहिए , ताकि उन्हें, जिनके 'कल' के लिए  उन हुतात्माओं ने अपना 'आज' कुर्बान कर दिया .आजादी के मोल का स्मरण रहे...... जय हिंद - जय भारत ।
     (कवितांश - अनामिका जैन 'अम्बर ' )

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