बुधवार, 23 जून 2021
देवरहा बाबा आश्रम, मईल,देवरिया
यहाँ जो भी निर्माण दिख रहा है, सब 90 के बाद का है। हम जहाँ बैठे हैं, जिस जगह लकड़ी के खम्भों पर एक कुटिया है, यहीं बाबा की मचान हुआ करती थी....पोरसा भर पानी में...सरजू मईया की गोद में। यहां तक बहती थी मईया ।89 में बाब मथुरा चले गए .....समाधि लेने। बाबा के मथुरा गमन के बाद सरजू मईया भी यहाँ से दूर चली गयीं ...दक्षिण की ओर। उन्होंने भी यह स्थान छोड़ दिया। बाबा के संस्मरण सुनाते सुनाते संत श्री कहीं खो - से गए ... बाबा जब बंगाल में थे तो उनके पास तमाम पशु पक्षी भी आते रहते थे ...मिलने के लिए ..बाघ भी। एक दिन बाबा उदाश थे ...कह रहे थे - मोहन भगत अब नहीं रहा ..गुजर गया। यह एक बाघ था ..हां! बाघ ही। देह - चक्षु की एक सीमा है ... यह उसके आगे नहीं देख सकतीं। इन्होंने उसे बाघ ही देखा था। बाकी, बाबा जानें। जाने कितने किस्से हैं लोगों के पास ..कितनी कहानियां। अगर आप जानना चाहते हैं तो आप उन तमाम लोगों से मिल सकते हैं जिनकी स्मृति बाबा के सान्निध्य - संजोग से सृजित अद्भुत अनुभूतियों से समृद्ध है। मैं संत - साधना की इस पुण्य भूमि को अपना प्रणाम निवेदित करने आया था ...बाबा करें - यह संयोग पुनः घटे ....ऊंँ नमो भगवते वासुदेवाय .....
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